10/31/2009

नये सपनो के लिए टूटती यादे

मेरे घर का पुराना हिस्‍सा जिसमें हमने 15 साल बिताये
यादों पर हथौड़ा चलाते कर्मचारी
घर का मुख्‍य द्वार
टूटती छत
मै और छोटी बिट्टी
बहुत मजबूत है, 23 से टूट रहा है

दोनो बड़े भइया, अदिति और छोटी बिट्टी

7 comments:

रंजन said...

क्या कहें.. नये के लिये पुरानों को जगह खाली करनी होती है..

आभा said...

यादों को दिल में सजों कर रखें कुछ पाने के लिए कुछ तोखोना ही पड़ेगा..........

पी.सी.गोदियाल said...

वाकई बहुत दुःख होता है, मैं भी गुजर चुका हूँ ऐसे दौर से !

अर्शिया said...

इस दर्द की एक अपनी मिठास है।
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स्त्री के चरित्र पर लांछन लगाती तकनीक।
चार्वाक: जिसे धर्मराज के सामने पीट-पीट कर मार डाला गया।

संजय बेंगाणी said...

निर्माण के लिए विध्वंस...प्रकृति का नियम है जी. दिल कड़ा कर लें, बड़ा दुख होता है. और फिर नए की खुशी? ... :)

Udan Tashtari said...

यही रीत है भाई...

प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI said...

है तो सच्चाई पर मुह नहीं मोड़ सकते ?

आगे चलते जाना है!!

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