8/18/2007

जॉच प्रविष्टि - पर आप टिप्‍पणी कर सकते है।

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यह नारद के कोड़ को लेकर की गई है। साथ में एक फोटों भी दे रहा हूँ। ताकि यह पोस्‍ट व्‍यर्थ न जाये :)



सब मुझे अकेला छोड़ कर कहॉं चले गये ?

यही सोच रहा होगा एक छोटा सा अकेला बादल

5 comments:

Shrish said...

बादल अकेला है, ये आपकी गलतफहमी है।

Udan Tashtari said...


उड़ चले थे खुद ही, इठलाते हुए,
अपनी धुन में यूँही गुनगुनाते हुए,
क्यूँ अब शरम नहीं आ रही तुम्हें
यूँ जमाने पर तोहमत लगाते हुए.


--यह बादल के इस टुकड़े के लिये है भाई जो सोच रहा है कि सब उसे अकेला छोड़ गये.

आपने तो कुछ लिखा ही नहीं है आपकी तो जाँच प्रविष्टि है, उस पर क्या टिपियाये. :)

Nishikant Tiwari said...

दिल की कलम से
नाम आसमान पर लिख देंगे कसम से
गिराएंगे मिलकर बिजलियाँ
लिख लेख कविता कहानियाँ
हिन्दी छा जाए ऐसे
दुनियावाले दबालें दाँतो तले उगलियाँ ।
NishikantWorld

deepanjali said...

जो हमे अच्छा लगे.
वो सबको पता चले.
ऎसा छोटासा प्रयास है.
हमारे इस प्रयास में.
आप भी शामिल हो जाइयॆ.
एक बार ब्लोग अड्डा में आके देखिये.

neeshoo said...

नर हो न निराश करो मन को , कुछ काम करो, कुछ काम करो

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